Monday, June 4, 2018


मेरी दहलीज के उग आए हैं कान
नुक्कड़ से गली को मुड़ती
हर पदचाप में तुम्हारी आहट तलाशते ।

चश्पा हो गयीं हैं
खिड़की पर दो आंखें
बिना पलक झपकाए
देखती उस मोड़ को
जहां पर बिला गये थे तुम
बिना एक बार भी पलट कर देखे।


दरवज्जे से टिक
पथराया हुआ
यह खोखल पिंजर
इंतजार में है
अपने गौतम के राम बन लौट आने के ।

Sunday, June 3, 2018


मैंने पढ़ी एक कविता
जो लिखी
टेरेस पर के गमले में
अंकुआए बीज की
कुलमुला कर आंख खोलती
नन्हीं दो पत्तियों ने,
और जो रची
खिड़की सामने के अमलतास के
इकलौते बासंती रेशमी गुच्छे पर झूलती
सनबर्ड ने,
वो जो कही
चोंच में तिनका दबाए
घोसला बनाती
दूर से उड़ आती
चिड़िया ने,
और अखबार के पन्नों पर
जम कर सूख गए
कत्थई थक्कों पर
ज्यों उचक आई
हल्की हरी दूब।


03.04.18

Friday, June 16, 2017



Freedom  is Gold of my field
None can limit my sky
It spreads far and wide.


Bigoted rules I shun
Broken shakles lay on feet
 I Spread my wings to fly

Dark woods ,deep ravines
Parched wounds far behind.
 Fearless I soak in sunshine

bedni_26



Thursday, January 23, 2014

कचनार की पांखुरी---

हरी घास के बीच
घुमावदार रास्ते पर
पैरों तले कुचली
कचनार की उस पांखुरी ने
अपनी चटक बैंगनी मुस्कान
मेरी तरफ उछाली,
अवसाद के

घटाटोप बादलों के बीच
उम्मीद की किरण
दिपदिपाई.





Tuesday, January 21, 2014



 1


Tender blades of green grass
Smiling on hardened rocks
Silky pink petals
Whispering to prickly thorns
 and
That one name
Anchor in life’s thunderous storms.
7.
What does her eyes see
Earth’s desire
Buried deep
Wriggling to be free.
Cerulean equanimity of sky,
Simmering  enormity of oceans.

What do her hands touch
The helpless invisibility of air,
The quivering flame of fire
Trying to stand upright,
The shrinking  veins of tree.

What does her body remember
The satin caressing,
The tingling sensations
Heightened passion

She spread herself
Across the space
Reaching out to beyond.

2.



One
who is unrevealed
one
who is invisible
one
who is impalpable
one
who is achromatic
I  invoke Him
And
my  call becomes
His name,His image,His touch,His color.